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| डर मत, मैं तेरे साथ हूँ – Fear Not, I Am With You |
डर से भरी दुनिया में परमेश्वर की आवाज़
आज का मनुष्य डर के साये में जी रहा है। कभी भविष्य की चिंता, कभी बीमारी का भय, कभी आर्थिक तंगी, कभी रिश्तों के टूटने का डर। समाचार, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत अनुभव—सब मिलकर मनुष्य के हृदय को भय से भर देते हैं। ऐसे समय में जब मन टूट जाता है, तब बाइबल का यह वचन आत्मा को नई शक्ति देता है:
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि परमेश्वर का वादा है—एक ऐसा वादा जो सदियों से विश्वासियों को सहारा देता आया है।
“डर मत” – यह आज्ञा नहीं, एक आश्वासन है
जब परमेश्वर कहता है, “डर मत”, तो वह हमारी कमजोरी को अनदेखा नहीं करता। वह जानता है कि हम डरते हैं। इसलिए यह वाक्य डाँट नहीं, बल्कि आश्वासन (Assurance) है।
बाइबल में "Fear Not" लगभग 365 बार आता है—मानो साल के हर दिन के लिए एक बार। यह हमें सिखाता है कि डर जीवन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन डर में जीना परमेश्वर की योजना नहीं है।
“मैं तेरे साथ हूँ” – परमेश्वर की उपस्थिति की शक्ति
डर का सबसे बड़ा कारण अकेलापन होता है। जब हमें लगता है कि हम अकेले हैं, तभी भय हावी होता है। लेकिन परमेश्वर कहता है:
यह वाक्य बाइबल का हृदय है। परमेश्वर दूर बैठकर केवल आदेश नहीं देता, बल्कि हमारे साथ चलने वाला परमेश्वर है।
बाइबल के उदाहरण:
1. मूसा – जब जिम्मेदारी डरावनी लगती है
मूसा ने कहा, “मैं कौन हूँ?” (निर्गमन 3:11)
2. यहोशू – जब भविष्य अनिश्चित हो
डर के प्रकार और परमेश्वर का उत्तर
1. भविष्य का डर (Fear of Future)
आज सबसे आम डर है—कल क्या होगा?
2. बीमारी और मृत्यु का डर
3. आर्थिक तंगी का डर
यीशु मसीह और “डर मत” का संदेश
यीशु के जीवन और शिक्षाओं में “डर मत” बार‑बार आता है।
डर और विश्वास: एक आत्मिक संघर्ष
डर और विश्वास साथ‑साथ नहीं चल सकते। जहाँ विश्वास बढ़ता है, वहाँ डर घटता है।
जब हम परमेश्वर के प्रेम को समझते हैं, तब डर की जड़ टूट जाती है।
आज के पाठक के लिए व्यावहारिक संदेश
यदि आप आज किसी डर से गुजर रहे हैं—
यह वचन आज भी जीवित है, सक्रिय है, और आपके जीवन में काम कर सकता है।
निष्कर्ष: डर से नहीं, विश्वास से चलें
डर परिस्थितियों को बड़ा दिखाता है, लेकिन विश्वास परमेश्वर को बड़ा दिखाता है। जब परमेश्वर हमारे साथ है, तो कोई भी डर हमें तोड़ नहीं सकता।
डर मत… क्योंकि वह आज भी आपके साथ है।

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