डर मत, मैं तेरे साथ हूँ – Fear Not, I Am With You - Click Bible

Choose Language

डर मत, मैं तेरे साथ हूँ – Fear Not, I Am With You

डर मत, मैं तेरे साथ हूँ – Fear Not, I Am With You
डर मत, मैं तेरे साथ हूँ – Fear Not, I Am With You

डर से भरी दुनिया में परमेश्वर की आवाज़

आज का मनुष्य डर के साये में जी रहा है। कभी भविष्य की चिंता, कभी बीमारी का भय, कभी आर्थिक तंगी, कभी रिश्तों के टूटने का डर। समाचार, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत अनुभव—सब मिलकर मनुष्य के हृदय को भय से भर देते हैं। ऐसे समय में जब मन टूट जाता है, तब बाइबल का यह वचन आत्मा को नई शक्ति देता है:

“डर मत, मैं तेरे साथ हूँ; भयभीत न हो, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ।”
(यशायाह 41:10)

यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि परमेश्वर का वादा है—एक ऐसा वादा जो सदियों से विश्वासियों को सहारा देता आया है।


“डर मत” – यह आज्ञा नहीं, एक आश्वासन है

जब परमेश्वर कहता है, “डर मत”, तो वह हमारी कमजोरी को अनदेखा नहीं करता। वह जानता है कि हम डरते हैं। इसलिए यह वाक्य डाँट नहीं, बल्कि आश्वासन (Assurance) है।

बाइबल में "Fear Not" लगभग 365 बार आता है—मानो साल के हर दिन के लिए एक बार। यह हमें सिखाता है कि डर जीवन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन डर में जीना परमेश्वर की योजना नहीं है।

“क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं, पर सामर्थ्य, प्रेम और संयम की आत्मा दी है।”
(2 तीमुथियुस 1:7)

“मैं तेरे साथ हूँ” – परमेश्वर की उपस्थिति की शक्ति

डर का सबसे बड़ा कारण अकेलापन होता है। जब हमें लगता है कि हम अकेले हैं, तभी भय हावी होता है। लेकिन परमेश्वर कहता है:

“मैं तेरे साथ हूँ”

यह वाक्य बाइबल का हृदय है। परमेश्वर दूर बैठकर केवल आदेश नहीं देता, बल्कि हमारे साथ चलने वाला परमेश्वर है।

बाइबल के उदाहरण:

1. मूसा – जब जिम्मेदारी डरावनी लगती है

मूसा ने कहा, “मैं कौन हूँ?” (निर्गमन 3:11)

परमेश्वर ने उत्तर दिया:

“निश्चय मैं तेरे साथ रहूँगा।”

2. यहोशू – जब भविष्य अनिश्चित हो

“जैसे मैं मूसा के साथ था, वैसे ही मैं तेरे साथ रहूँगा।”
(यहोशू 1:5–9)

डर के प्रकार और परमेश्वर का उत्तर

1. भविष्य का डर (Fear of Future)

आज सबसे आम डर है—कल क्या होगा?

“अपने मन पर बोझ न डालो… तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है।”
(मत्ती 6:34)

2. बीमारी और मृत्यु का डर

“चाहे मैं घोर अन्धकार की तराई में चलूँ, तौभी मैं किसी से न डरूँगा, क्योंकि तू मेरे साथ है।”
(भजन संहिता 23:4)

3. आर्थिक तंगी का डर

“यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे किसी बात की घटी न होगी।”
(भजन 23:1)

यीशु मसीह और “डर मत” का संदेश

यीशु के जीवन और शिक्षाओं में “डर मत” बार‑बार आता है।

•जब तूफान आया – “डरो मत।” (मरकुस 4:40)
•जब पतरस डूबने लगा – यीशु ने हाथ बढ़ाया
•जब शिष्य भयभीत थे – यीशु ने कहा:

“मैं हूँ, डरो मत।”
(यूहन्ना 6:20)

यीशु केवल शब्द नहीं बोले—उन्होंने अपने जीवन, क्रूस और पुनरुत्थान से डर को पराजित किया।

डर और विश्वास: एक आत्मिक संघर्ष

डर और विश्वास साथ‑साथ नहीं चल सकते। जहाँ विश्वास बढ़ता है, वहाँ डर घटता है।

“पूर्ण प्रेम से डर दूर हो जाता है।”
(1 यूहन्ना 4:18)

जब हम परमेश्वर के प्रेम को समझते हैं, तब डर की जड़ टूट जाती है।


आज के पाठक के लिए व्यावहारिक संदेश

यदि आप आज किसी डर से गुजर रहे हैं—

•परीक्षा का डर
•नौकरी या व्यापार का डर
•परिवार या भविष्य का डर
तो यह वचन आपके लिए है:
“डर मत, मैं तेरे साथ हूँ।”

यह वचन आज भी जीवित है, सक्रिय है, और आपके जीवन में काम कर सकता है।


निष्कर्ष: डर से नहीं, विश्वास से चलें

डर परिस्थितियों को बड़ा दिखाता है, लेकिन विश्वास परमेश्वर को बड़ा दिखाता है। जब परमेश्वर हमारे साथ है, तो कोई भी डर हमें तोड़ नहीं सकता।

“यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो कौन हमारा विरोधी हो सकता है?”
(रोमियों 8:31)

आज निर्णय आपका है—
डर के साथ चलना या परमेश्वर के वादे के साथ।

डर मत… क्योंकि वह आज भी आपके साथ है।


No comments:

Post a Comment