दुख में परमेश्वर कहाँ होता है? | Where Is God in Suffering? | Biblical Truth for Broken Hearts - Click Bible

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दुख में परमेश्वर कहाँ होता है? | Where Is God in Suffering? | Biblical Truth for Broken Hearts

दुख में परमेश्वर कहाँ होता है? | Where Is God in Suffering? | Biblical Truth for Broken Hearts
दुख में परमेश्वर कहाँ होता है? | Where Is God in Suffering?


जब जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तब परमेश्वर पर विश्वास करना आसान लगता है।
लेकिन जब दुख, पीड़ा, बीमारी, नुकसान, धोखा या मृत्यु हमारे जीवन में प्रवेश करती है — तब एक सवाल हमारे मन और आत्मा को झकझोर देता है:

“दुख में परमेश्वर कहाँ होता है?”

यह सवाल केवल तर्क का नहीं, बल्कि टूटे हुए दिल, आँसुओं और चुप रातों का सवाल है।
भारत जैसे देश में, जहाँ लोग भावनाओं से जीते हैं, यह प्रश्न और भी गहरा हो जाता है।
कई लोग कहते हैं:
•“अगर परमेश्वर है, तो ये सब क्यों हुआ?”
•“मैंने तो प्रार्थना की थी, फिर भी क्यों?”
•“क्या परमेश्वर मुझे भूल गया?”

यह लेख किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि एक सहयात्री की तरह लिखा गया है — जो आपके दुख को समझता है, आपके आँसुओं को हल्का करता है, और बाइबल की रोशनी में आपको सच्चाई तक ले जाता है।

1. दुख कोई नया अनुभव नहीं है (Suffering Is Not New)

अक्सर हम सोचते हैं कि दुख केवल हमारे साथ ही हुआ है।
लेकिन बाइबल बताती है कि परमेश्वर के सबसे प्रिय लोग भी दुख से गुज़रे हैं।
•अय्यूब ने सब कुछ खो दिया
•दाऊद ने अपमान, विश्वासघात और डर देखा
•यूसुफ को अपने ही भाइयों ने बेच दिया
•यिर्मयाह ने अकेलापन और तिरस्कार सहा
•यीशु मसीह ने क्रूस पर पीड़ा सही

“इस संसार में तुम्हें क्लेश होगा…”
— यूहन्ना 16:33

दुख इस संसार की वास्तविकता है।
लेकिन यही वचन आगे कहता है:

“…परन्तु ढाढ़स बाँधो, मैंने संसार को जीत लिया है।”

2. क्या दुख का अर्थ है कि परमेश्वर दूर है?

यह सबसे आम भ्रम (misunderstanding) है।

जब हम दुख में होते हैं, तो हमें परमेश्वर की चुप्पी उसकी अनुपस्थिति लगती है।
लेकिन बाइबल कहती है:

“यहोवा टूटे मन वालों के निकट रहता है।”
— भजन संहिता 34:18

👉 ध्यान दीजिए —
परमेश्वर दुख से दूर नहीं, बल्कि दुख में और पास होता है।

हमारी समस्या यह है कि:

•हम परमेश्वर को केवल चमत्कारों में ढूँढते हैं
•लेकिन वह अक्सर साथ-साथ चलने में प्रकट होता है

3. दुख में परमेश्वर चुप क्यों लगता है?

कई बार प्रार्थना करते समय लगता है कि:

•कोई उत्तर नहीं
•कोई संकेत नहीं
•केवल सन्नाटा

यह चुप्पी हमें डराती है।

लेकिन बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर की चुप्पी उसकी अनुपस्थिति नहीं है।

“चुप रहो और जान लो कि मैं परमेश्वर हूँ।”
— भजन संहिता 46:10

परमेश्वर अक्सर चुप रहकर:

•हमें परिपक्व करता है
•हमारे विश्वास को गहराई देता है
हमें दूसरों पर नहीं, केवल उस पर निर्भर करना सिखाता है

4. यीशु मसीह — दुख को समझने वाला परमेश्वर

ईसाई विश्वास की सबसे सुंदर सच्चाई यह है कि
हमारा परमेश्वर दुख से अनजान नहीं है।

यीशु मसीह ने:

•भूख सही
•तिरस्कार सहा
•धोखा झेला
•अकेलापन महसूस किया
और क्रूस पर असहनीय पीड़ा झेली
“हमारा ऐसा महायाजक नहीं जो हमारी दुर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके।”
— इब्रानियों 4:15

👉 इसका अर्थ:
जब आप रोते हैं — यीशु समझता है
जब आप टूटते हैं — वह जानता है
जब आप सवाल करते हैं — वह नाराज़ नहीं होता

5. दुख में परमेश्वर हमें क्या सिखाता है?

दुख कोई दंड नहीं, बल्कि अक्सर एक प्रक्रिया (process) होता है।

(a) दुख हमें नम्र बनाता है

जब सब कुछ हमारे नियंत्रण में नहीं रहता, तब हम परमेश्वर की ओर झुकते हैं।

(b) दुख हमें शुद्ध करता है

“क्योंकि जिस से प्रभु प्रेम करता है, उसे ताड़ना भी देता है।”
— इब्रानियों 12:6

(c) दुख हमें दूसरों के लिए संवेदनशील बनाता है

जो खुद टूटा है, वही दूसरों को सहारा देना जानता है।

6. जब प्रार्थनाएँ अधूरी लगती हैं

बहुत से लोग कहते हैं:

“मैंने तो बहुत प्रार्थना की, फिर भी कुछ नहीं बदला।”

परमेश्वर हर प्रार्थना का उत्तर देता है —
लेकिन हमेशा हमारे तरीके से नहीं।

उत्तर तीन प्रकार के होते हैं:

  1. Yes – तुरंत

  2. Wait – समय लेकर

  3. No – क्योंकि परमेश्वर कुछ बेहतर जानता है

“क्योंकि मेरे विचार तुम्हारे विचार नहीं हैं।”
— यशायाह 55:8

7. दुख में परमेश्वर कैसे साथ चलता है?

परमेश्वर अक्सर दुख को हटाने से पहले:

•हमें संभालता है
•हमें सहन करने की शक्ति देता है
“मेरी अनुग्रह तेरे लिए पर्याप्त है।”
— 2 कुरिन्थियों 12:9

👉 दुख में:

•वह आपको गिरने नहीं देता
•वह आपको छोड़ता नहीं
•वह आपको तोड़कर छोड़ नहीं देता

8. दुख अस्थायी है, आशा स्थायी (Hope Beyond Pain)

बाइबल दुख को नकारती नहीं, लेकिन उसे अंतिम शब्द भी नहीं देती।

“हमारे पल भर के हल्के क्लेश से हमारे लिए अत्यन्त महिमा का भारी अनन्त भार उत्पन्न होता है।”
— 2 कुरिन्थियों 4:17

परमेश्वर का वादा है:

•आँसू सदा नहीं रहेंगे
•अंधेरा अंतिम नहीं है
•दर्द की एक समाप्ति है
“वह उनकी आँखों से हर एक आँसू पोंछ डालेगा।”
— प्रकाशितवाक्य 21:4

9. अगर आप अभी दुख में हैं… (A Personal Word)

अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं और:

•दिल भारी है
•सवाल बहुत हैं
•विश्वास कमजोर लग रहा है

तो जान लीजिए:

👉 परमेश्वर आपसे नाराज़ नहीं है
👉 वह आपको छोड़कर नहीं गया
👉 वह इस दुख में भी आपके साथ है

कभी-कभी परमेश्वर दुख को हटाने से पहले,
हमें उसके सहने लायक बना देता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दुख में परमेश्वर कहाँ होता है?
उत्तर सरल है, लेकिन गहरा:

👉 वह वहीं होता है — जहाँ आपका दर्द है।

वह:

•टूटे मन के पास है
•रोते हुए के साथ है
•चुप रातों में जाग रहा है

दुख विश्वास को खत्म नहीं करता —
बल्कि सही अर्थों में विश्वास को जन्म देता है।

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